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अक्षय तृतीया 2025: जानें शुभ तिथि, सोना खरीदने का मुहूर्त और इसका धार्मिक महत्व

By Rachna Sharma Gupta · 21 April 2025

Akshaya tritiya tithi mahurat

अक्षय तृतीया, जिसे ‘अखतेज’ के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में एक अत्यंत शुभ और फलदायक तिथि मानी जाती है। यह तिथि वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को आती है और इसे स्थायी सौभाग्य, समृद्धि और पुण्य प्राप्त करने का दिन माना जाता है। इस दिन किए गए शुभ कार्यों का फल कभी क्षय नहीं होता — यही इसका सार है: “अक्षय” अर्थात जो कभी समाप्त न हो।

अक्षय तृतीया 2025 की तिथि और मुहूर्त

वर्ष 2025 में अक्षय तृतीया 30 अप्रैल को मनाई जाएगी। वैदिक पंचांग के अनुसार, तृतीया तिथि का आरंभ 29 अप्रैल को शाम 5:31 बजे से होगा और यह 30 अप्रैल को दोपहर 2:12 बजे तक प्रभावी रहेगी।

पूजन का शुभ मुहूर्त

  • पूजा आरंभ करने का समय: 30 अप्रैल, सुबह 5:41 बजे
  • पूजा समापन समय: दोपहर 12:18 बजे तक

इस मुहूर्त के दौरान देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

सोना खरीदने का शुभ समय

अक्षय तृतीया के दिन सोना खरीदना शुभ और लाभकारी माना जाता है। यह परंपरा देवी लक्ष्मी के आशीर्वाद को आकर्षित करने का एक माध्यम है।

🪙 शुभ समय सोना खरीदने का

  • 30 अप्रैल, सुबह 5:41 से दोपहर 2:12 बजे तक
  • इसके अतिरिक्त, 29 अप्रैल की संध्या को भी सोना खरीदा जा सकता है।

शुभ योग और नक्षत्र

इस वर्ष अक्षय तृतीया पर शोभन योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का विशेष संयोग बन रहा है।

  • शोभन योग समाप्त होगा: दोपहर 12:02 बजे
  • सर्वार्थ सिद्धि योग: पूरा दिन
  • इसके अलावा, रवि योग भी रात्रि में रहेगा, जो शुभ कार्यों के लिए फलदायक माना गया है।

🪷 नक्षत्र और करण

  • नक्षत्र: रोहिणी और मृगशिरा
  • करण: गर और वणिज — दोनों ही शुभ माने जाते हैं

धार्मिक महत्व और पूजन का महत्व

अक्षय तृतीया के दिन लक्ष्मी-नारायण की विशेष पूजा का विधान है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन की गई पूजा से जीवन में स्थायी सुख-समृद्धि और वैभव प्राप्त होता है।
देवी लक्ष्मी को श्रीफल चढ़ाना इस दिन विशेष रूप से फलदायक माना गया है। साथ ही, दान-पुण्य, अन्न-दान, और तुलसी जल अर्पण करना भी अत्यंत शुभ माना गया है।

अक्षय तृतीया केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक शुभ अवसर है अपने जीवन में स्थायी समृद्धि और सौभाग्य का स्वागत करने का। यदि सही मुहूर्त में देवी लक्ष्मी की पूजा और दान-पुण्य किया जाए, तो इससे न केवल आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होती है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का भी संचार होता है।